बांग्लादेश में टेक्सटाइल फैक्ट्रियां बंद करने की चेतावनी भारतीय धागा उद्योग पर आरोप 10 लाख नौकरियां खतरे में
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बांग्लादेश में टेक्सटाइल फैक्ट्रियां बंद करने की चेतावनी भारतीय धागा उद्योग पर आरोप 10 लाख नौकरियां खतरे में

बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री गंभीर संकट से गुजर रही है। टेक्सटाइल मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जनवरी के अंत तक यार्न (धागे) के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को खत्म नहीं करती, तो 1 फरवरी से देशभर की मिलों में काम बंद कर दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश के कॉमर्स मंत्रालय ने नेशनल रेवन्यू बोर्ड को इंपोर्टेड यार्न पर ड्यूटी-फ्री सुविधा खत्म करने की सिफारिश की है। मिल मालिकों का कहना है कि भारत से आने वाला सस्ता धागा घरेलू बाजार में भर गया है, जिससे 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का स्टॉक बिना बिका रह गया है।

बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने कहा है कि यह कदम उठाना मजबूरी है, क्योंकि आयातित सस्ता धागा स्थानीय उद्योग को बर्बाद कर रहा है। 50 से अधिक कपड़ा मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं, जिससे हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं।

वित्तीय दबाव बढ़ने के साथ-साथ मिल मालिक ऋण चुकाने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। इससे लोकल इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है। बराबरी की प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है। मिल बंद होने से 10 लाख नौकरियां जाना का खतरा है।

टेक्सटाइल सेक्टर को 2 अरब डॉलर का नुकसान

कई सालों से बांग्लादेश के गारमेंट निर्माता भारत से कॉटन यार्न और चीन से पॉलिएस्टर यार्न का इंपोर्ट करते रहे हैं। बीते तीन-चार महीनों में गैस की कमी, अनियमित सप्लाई और बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने और दिक्कतें पैदा कर दी है।

गैस की अनियमित आपूर्ति और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से टेक्सटाइल सेक्टर को करीब 2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। कई मिलों में उत्पादन क्षमता 50 प्रतिशत तक घट गई है।

मिल मालिकों की मुख्य मांगें हैं

  • धागे के ड्यूटी-फ्री आयात को तुरंत बंद किया जाए
  • सस्ती गैस की आपूर्ति
  • संकट काल में टैक्स में छूट मिले
  • बैंक लोन पर ब्याज दर कम की जाए
  • सरकार के साथ बातचीत से सेक्टर को स्थिर किया जाए।

गारमेंट फैक्टरियों को मिलती है ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा

बांग्लादेश में गारमेंट निर्यात करने वाली फैक्टरियों को ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत मिलती है। यह एक सरकारी नीति है जो 1980 के दशक से चली आ रही है, जिसका मुख्य मकसद निर्यात को बढ़ावा देना है।

ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट यार्न पर बॉन्डेड सुविधा एक टैक्स छूट है जो सिर्फ निर्यात करने वाली फैक्टरियों को मिलती है, ताकि वे सस्ते में कच्चा माल लाकर ज्यादा निर्यात कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था को फायदा हो।

  • बॉन्डेड वेयरहाउस एक खास तरह का गोदाम होता है, जहां गारमेंट फैक्टरियां विदेश से कच्चा माल जैसे धागा, कपड़ा, बटन आदि) बिना कोई कस्टम ड्यूटी, वैट, इनकम टैक्स या सेल्स टैक्स चुकाए आयात कर सकते हैं।
  • यह सुविधा सिर्फ उन कंपनियों को मिलती है जो अपना ज्यादातर प्रोडक्शन निर्यात करती हैं
  • आयात किया गया धागा गोदाम में बॉन्ड रहता है, यानी सरकार पर टैक्स का बोझ नहीं पड़ता। फैक्ट्री उस धागे से कपड़े बनाती है और तैयार माल को विदेश निर्यात करती है।
  • निर्यात होने के बाद ही यह माल ड्यूटी-फ्री माना जाता है। अगर कोई हिस्सा घरेलू बाजार में बेचा जाता है, तो उस पर ड्यूटी चुकानी पड़ती है।
  • खासकर 10 से 30 काउंट के कॉटन यार्न पर यह सुविधा बहुत इस्तेमाल होती है, क्योंकि बांग्लादेश के निटवियर (जर्सी, टी-शर्ट आदि) गारमेंट निर्यातक इसी तरह के धागे का इस्तेमाल करते हैं। यह धागा भारत से बहुत सस्ता और अच्छी क्वालिटी में मिलता है।

78 प्रतिशत यार्न भारत से इंपोर्ट हो रहा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में बांग्लादेश ने लगभग 70 करोड़ किलोग्राम धागा इंपोर्ट किया, जिसकी कीमत करीब 2 अरब डॉलर थी।

इसमें से 78 प्रतिशत धागा भारत से आया। अगर स्पिनिंग यूनिटें बंद हुईं, तो देश भर में करीब 10 लाख मजदूरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं, जिससे सामाजिक अशांति भी फैलने का डर है।

दूसरी तरफ, गारमेंट निर्यातक (बीजीएमईए) इस कदम का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय धागा भारतीय धागे से काफी महंगा और कम गुणवत्ता वाला है।

अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स बेहतर क्वालिटी और स्थिरता के लिए भारतीय धागे को ही पसंद करते हैं। अगर ड्यूटी-फ्री आयात बंद हुआ, तो गारमेंट बनाने की लागत बढ़ेगी, जिससे बांग्लादेश का वैश्विक परिधान बाजार में मुकाबला कमजोर हो जाएगा।

एक भारतीय यार्न निर्यातक अमित सोती ने कहा कि यह फैसला बांग्लादेश के निर्यात उद्योग को नुकसान पहुंचाएगा।

गारमेंट सेक्टर में ज्यादातर महिलाएं, ये 84% विदेशी मुद्रा का सोर्स

गारमेंट सेक्टर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह उद्योग हर साल देश की 84% विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।

साथ ही, यह सीधे 50 लाख और अप्रत्यक्ष रूप से 1.5 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। खास बात यह है कि इस उद्योग में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। लेकिन मौजूदा संकट ने इस पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।

बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक

चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक है। बांग्लादेश का मासिक अपैरल और टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 30 हजार करोड़ रुपए का है।

वहीं, 12,500 करोड़ के साथ भारत चौथे नंबर पर है। यूरोपीय यूनियन व यूके को होने वाले ग्लोबल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में बांग्लादेश की हिस्सेदारी 10% से ज्यादा है।

टेक्सटाइल निर्माताओं के संघ इंडियन टेक्सप्रेनर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी प्रभु दामोदरन का कहना है कि अगर बांग्लादेश से बिजनेस यहां आता है तो हमारे पास 3500 करोड़ के ऑर्डर संभालने की क्षमता है।

बांग्लादेश टॉमी हिलफिगर, केल्विन क्लेन जैसे ब्रांड्स के लिए कपड़े बनाता है

बांग्लादेश टॉमी हिलफिगर, केल्विन क्लेन और राल्फ लॉरेन जैसे अमेरिकी ब्रांड के लिए कपड़े बनाता है। इसके अलावा स्वीडन के H&M, इटली के जियोर्जियो अरमानी, जर्मनी के ह्यूगो बॉस और प्यूमा, और स्पेन के जारा जैसे ब्रांड के लिए भी कपड़े बनाता है।

ये ब्रांड्स बांग्लादेश में सस्ती लेबर और बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा के कारण अपने कपड़े बनवाते हैं। बांग्लादेश के करीब 4,000 से ज्यादा कारखाने और 40 लाख से अधिक श्रमिक इस उद्योग का हिस्सा हैं, जो इसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड कपड़ा निर्यातक बनाता है।

10:13 AM, Jan 26

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